तेरापंथ धर्मसंघ की नियति है कि
वह युग के साथ चलता है |
युग को नया मोड़ देने की क्षमता भी उसमें है |
वह युग के साथ चलता है |
युग को नया मोड़ देने की क्षमता भी उसमें है |
किन्तु वह न प्रवाह्पाती है और
न बिना किसी प्रयोजन युग से टक्कर लेने का पक्षधर है |
अनेकांतवादी दृष्टिकोण के आधार पर ही संघ में विकास के नए क्षितिज खुलते रहे हैं |
उनमें एक क्षितिज है - - शिक्षा |
पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री कालूगणी का संस्कृत-प्रेम विलक्षण था |
मैंने अपने जीवन में संस्कृत भाषा के प्रति इतनी रूचि किसी में भी नहीं देखी |
तेरापंथ धर्मसंघ में संस्कृत को पल्लवित करने का काफी श्रेय पूज्य गुरुदेव को दिया जा सकता है |
न बिना किसी प्रयोजन युग से टक्कर लेने का पक्षधर है |
अनेकांतवादी दृष्टिकोण के आधार पर ही संघ में विकास के नए क्षितिज खुलते रहे हैं |
उनमें एक क्षितिज है - - शिक्षा |
पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री कालूगणी का संस्कृत-प्रेम विलक्षण था |
मैंने अपने जीवन में संस्कृत भाषा के प्रति इतनी रूचि किसी में भी नहीं देखी |
तेरापंथ धर्मसंघ में संस्कृत को पल्लवित करने का काफी श्रेय पूज्य गुरुदेव को दिया जा सकता है |
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