नए व्याकरण का निर्माण
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नए व्याकरण के निर्माण में पूज्य गुरुदेव का पूरा युग बीत गया |
पूज्य कालूगणी की प्रेरणा, संघ की नियति,
पंडितजी का योग और संतों का पुरुषार्थ --
कुल मिलाकर एक बहुत सुन्दर व्याकरण ग्रन्थ तैयार हो गया |
उसे आधार बनाकर धर्मसंघ के साधू-साध्वियां युग-युग तक अध्ययन करती रहेंगी |
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आज तेरापंथ धर्मसंघ में संस्कृत के हिमालय पर आरोहण करने के लिए
" कालूकौमुदी " रूप सोपानमार्ग का ही सहारा लिया जाता है |
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से
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