Wednesday, September 26, 2012

४६. कैसे पढ़ा मैंने व्याकरण ?

कैसे पढ़ा मैंने व्याकरण ?
अपने यहां छुट्टी का क्या काम ?
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गुरुदेव हम साधुओं को पढ़ाते थे |
चतुर्दशी का दिन आया |
हमने पढ़ने से अवकाश ले लिया |
गुरुदेव ने बुलाकर पूछा -
" आज पढ़ने क्यों नहीं आए ?"
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मैंने निवेदन किया -
" आज मुंहपत्ती, निसीतिया आदि धोने हैं,
इसलिए आज छुट्टी है |"
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गुरुदेव ने हमको प्रतिबोध देते हुए कहा -
" अपने यहां छुट्टी का क्या काम ?
पढ़ने के समय पढ़ो |
दिन भर समय ही समय है |
धोने का काम बाद में कर लेना |"
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हमारे पास समय नहीं था, यह बात नहीं थी |
पर हम पढ़ने से जी चुराते थे,
इसलिए छुट्टी पाने का बहाना खोजते रहते थे |

- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से

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