मेरा विद्यालय - अंग्रेजी राज
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उस समय देश में अंग्रेजों का शासन था |
भारत स्वतंत्र है या परतंत्र,
यह ज्ञान मुझे नहीं था |
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एक समय आया, जब देशभक्ति की लहर आई |
बड़े-बड़े शहरों से उठी वह लहर छोटे कस्बों और गांवों तक भी पहुंच गई |
उन दिनों स्कूल में संगीत का अभ्यास कराते समय ऐसे गीत सिखाए गए,
जिनमें देशभक्ति तथा देश के प्रति होने वाले अन्याय का चित्रण रहता |
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एक समय आया, जब देशभक्ति की लहर आई |
बड़े-बड़े शहरों से उठी वह लहर छोटे कस्बों और गांवों तक भी पहुंच गई |
उन दिनों स्कूल में संगीत का अभ्यास कराते समय ऐसे गीत सिखाए गए,
जिनमें देशभक्ति तथा देश के प्रति होने वाले अन्याय का चित्रण रहता |
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वे सब बातें मेरी समझ में नहीं आती,
फिर भी एक विशेष प्रकार की भावना निर्मित होती गई |
उस समय खद्दरधारी लोगों के प्रति विशेष आदर के भाव नहीं थे |
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फिर भी एक विशेष प्रकार की भावना निर्मित होती गई |
उस समय खद्दरधारी लोगों के प्रति विशेष आदर के भाव नहीं थे |
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अंग्रेजों के राज में जनता स्वयं को सुखी अनुभव करती थी |
इसलिए उनके प्रति भक्ति थी |
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इसलिए उनके प्रति भक्ति थी |
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उस समय विद्दार्थियों पर पुस्तकों का भार अधिक नहीं था |
गणित के पहाड़े कंठस्थ याद कराये जाते थे |
कंठस्थ ज्ञान के प्रति मेरी सहज रूचि थी |
स्कूली ज्ञान के अतिरिक्त मैंने
पचीस बोल, पानां की चर्चा, हित शिक्षा के पचीस बोल,
णमोक्कार मन्त्र, तिक्खुत्तो पाठ, सामायिक पाठ, पंचपद वंदना आदि
धार्मिक चीजें भी छुटपन में कंठस्थ कर ली थीं |
गणित के पहाड़े कंठस्थ याद कराये जाते थे |
कंठस्थ ज्ञान के प्रति मेरी सहज रूचि थी |
स्कूली ज्ञान के अतिरिक्त मैंने
पचीस बोल, पानां की चर्चा, हित शिक्षा के पचीस बोल,
णमोक्कार मन्त्र, तिक्खुत्तो पाठ, सामायिक पाठ, पंचपद वंदना आदि
धार्मिक चीजें भी छुटपन में कंठस्थ कर ली थीं |
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से
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