Friday, August 24, 2012

९. मेरा बचपन : अंतर क्यों ?

मेरा बचपन : अंतर क्यों ?
---
बचपन में कभी-कभार मैं भी रोता था |
किन्तु किसी दुसरे का रोना मुझे पसंद नहीं था |
---
घर में भोज का प्रसंग था |
प्रायः लोग भोजन कर निवृत्त हो चुके थे |
उनकी जूठी थालियाँ यत्र तत्र बिखरी हुई थी |
मैंने उनको एकत्रित करना शुरू कर दिया |
किसी ने टोकते हुए मुझे कहा -
" तू क्या कर रहा है ?
क्या यह तेरा काम है ?
इन्हें तो काम करनेवाले आकर उठाएंगे |"
---
मैं देखता ही रह गया |
मैंने सोचा -
मुझे रोका क्यों गया ?
मैं कोई गलत काम तो नहीं कर रहा था |
मैं अपनी थाली उठाकर रखता हूं,
वैसे ही बिरादरी के भाइयों की थालियाँ उठाकर रख देता,
तो क्या होता ?
लगता है, इस काम को छोटा माना जाता है |
---
कई बार मेरे मन में यह विचार कौंधता रहा कि
एक ही काम को कुछ लोग कर सकते हैं
और कुछ नहीं कर सकते |
यह अंतर क्यों ?
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से

No comments:

Post a Comment