मेरा ननिहाल पक्ष
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मेरा नाना का नाम था पूनमचन्दजी कोठारी |
वे सहज रूप से सात्विक वृत्ति के व्यक्ति थे |
मेरी नानीजी प्रज्ञा चक्षु थीं |
मेरी मां के धार्मिक संस्कारों की निर्मात्री वही थी |
मेरा नाना का नाम था पूनमचन्दजी कोठारी |
वे सहज रूप से सात्विक वृत्ति के व्यक्ति थे |
मेरी नानीजी प्रज्ञा चक्षु थीं |
मेरी मां के धार्मिक संस्कारों की निर्मात्री वही थी |
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हमीरमलजी कोठारी मेरी मां का चचेरे भाई थे |
वे मुझे बहुत प्यार करते थे |
वे बहुत बार मुझे लक्ष्य बना कर कहते -
" ये हमारे तुलसीदासजी बनेंगे |"
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हमीरमलजी कोठारी मेरी मां का चचेरे भाई थे |
वे मुझे बहुत प्यार करते थे |
वे बहुत बार मुझे लक्ष्य बना कर कहते -
" ये हमारे तुलसीदासजी बनेंगे |"
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उस समय कौन जानता था कि
' तुलसी ' साधू बनेगा |
हमीरमल जी द्वारा सहज भाव से कहा गया वचन सही प्रमाणित हो गया |
' तुलसी ' साधू बनेगा |
हमीरमल जी द्वारा सहज भाव से कहा गया वचन सही प्रमाणित हो गया |
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से
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