खेलकूद के प्रति अधिक आकर्षण नहीं था |
इसलिए उसमें मेरी सम्भागिता कम ही रहती थी |
फिर भी यदा-कदा साथियों के साथ खेलकूद में भाग भी लेता था |
खेलते समय भी मैं पचीस बोल आदि का स्मरण करता रहता था |
उस समय के खेलों में कबड्डी, गुल्ली-डंडा आदि की प्रधानता थी |
आंखमिचौनी और गेंद का खेल भी खेलते थे |
कभी-कभी हम खेल में हारे हुए विद्दार्थियों को घोड़ी बनाकर उस पर चढ जाते
और उसे चलाते समय हंसी से लोट-पोट हो जाते |
स्कूल में फुटबाल लाने की चर्चा काफी समय तक चलती रही
पर मैं जब तक वहां रहा,
फुटबाल नहीं आया |
स्कूल की पढ़ाई में मेरा मन लगता था |
घरवाले आगे पढ़ाना भी चाहते थे |
किन्तु पूज्य गुरुदेव कालूगणी का निकट सान्निध्य पाने के बाद मेरा मन विरक्त हो गया |
दीक्षा लेकर कालूगणी के पास पढ़ने की भावना प्रबल हो उठी |
मैंने स्कूल छोड़ दिया |
मास्टरजी की भी इच्छा थी कि मैं और पढूं |
किन्तु मेरे सामने एक बड़ा आकर्षण था |
उस एक आकर्षण से मेरे जीवन की दिशा बदल गयी |
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