मेरा घर - धर्म पट्टी
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लाडनूं की दूसरी पट्टी ' धर्म पट्टी ' कहलाती है |
हमारे घर से साध्वियों का ठिकाना - सेवा केंद्र बहुत निकट है |
हमारी मां की साध्वियों के प्रति श्रद्धा-भक्ति की भावना बहुत प्रबल थी |
गोचरी-पानी आदि के लिए साध्वियों का आगमन होता ही रहता था |
लाडनूं की दूसरी पट्टी ' धर्म पट्टी ' कहलाती है |
हमारे घर से साध्वियों का ठिकाना - सेवा केंद्र बहुत निकट है |
हमारी मां की साध्वियों के प्रति श्रद्धा-भक्ति की भावना बहुत प्रबल थी |
गोचरी-पानी आदि के लिए साध्वियों का आगमन होता ही रहता था |
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कभी-कभी साध्वियां पानी के तुम्बे घर की सीढ़ियों पर रखकर आगे जातीं
तो हम बच्चों से कहती -
" भाई ! यहां तुम्बा-पातरा पड़ा है |
तुम इसका ध्यान रखना |"
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कभी-कभी साध्वियां पानी के तुम्बे घर की सीढ़ियों पर रखकर आगे जातीं
तो हम बच्चों से कहती -
" भाई ! यहां तुम्बा-पातरा पड़ा है |
तुम इसका ध्यान रखना |"
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धर्म-स्थान के निकट घर होने के कारण हमें घर बैठे और
गली में खेलते समय भी साध्वियों के दर्शन करने का मौका मिल जाता |
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हमारा घर बहुत साफ़-सुथरा रहता था |
मकान की पूरी सफाई दीवाली के अवसर पर होती |
रसोई, आँगन, छत, गुमारिये आदि सब झाड़-पौंछ कर साफ़ करते थे |
रोजाना की सफाई मां के जिम्मे थी |
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मकान की पूरी सफाई दीवाली के अवसर पर होती |
रसोई, आँगन, छत, गुमारिये आदि सब झाड़-पौंछ कर साफ़ करते थे |
रोजाना की सफाई मां के जिम्मे थी |
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मैं कुछ बड़ा हुआ तो मां को झाड़ू-बुहारी
करते देख संकोच का अनुभव होता था |
फिर भी कभी काम में मां का हाथ नहीं बटाया |
क्योंकि मैंने समझ लिया कि
वह काम मां का ही है |
फिर भी कभी काम में मां का हाथ नहीं बटाया |
क्योंकि मैंने समझ लिया कि
वह काम मां का ही है |
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से
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