मेरा विद्यालय
--------------
मैं पहली बार स्कूल गया, तब मेरी उम्र ६ वर्ष की रही होगी |
स्कूल जाते समय हम दोपहर का नाश्ता साथ ले जाते थे,
मैं पहली बार स्कूल गया, तब मेरी उम्र ६ वर्ष की रही होगी |
स्कूल जाते समय हम दोपहर का नाश्ता साथ ले जाते थे,
मां के हाथ का बनाया हुआ वह ठंडा भोजन हमें बहुत ही मीठा और प्रिय लगता था |
---
---
निर्धारित समय पर छुट्टी का घंटा बजता |
हम हल्ला मचाते - " चालो छोरां छुट्टी "
मुझे अपने क्लास का मोनिटर बना दिया गया |
बच्चों को पढाने के साथ-साथ मैं अनुशासन भी करता |
---
हम हल्ला मचाते - " चालो छोरां छुट्टी "
मुझे अपने क्लास का मोनिटर बना दिया गया |
बच्चों को पढाने के साथ-साथ मैं अनुशासन भी करता |
---
ऐसा लगता है कि
अनुशासन करना मेरी रूचि का विषय था |
उल्लेखनीय है कि अनुशासन की अवहेलना मेरे लिए असह्य हो जाती |
---
अनुशासन करना मेरी रूचि का विषय था |
उल्लेखनीय है कि अनुशासन की अवहेलना मेरे लिए असह्य हो जाती |
---
मेरी दूसरी अभिरुचि विद्वान बनने की थी |
विद्वान कौन होता है ? और कैसे बना जाता है ?
मैं जानता नहीं था |
पर वह भावना तीव्र थी |
---
विद्वान कौन होता है ? और कैसे बना जाता है ?
मैं जानता नहीं था |
पर वह भावना तीव्र थी |
---
स्कूल में - हिंदी और गणित,
ये दो ही विषय पढाए जाते थे |
ये दो ही विषय पढाए जाते थे |
---
मेरे शिक्षक हीरालालजी मुझे
मेरे शिक्षक हीरालालजी मुझे
कैसे चलना,
कैसे बैठना,
बड़ों के साथ कैसे व्यवहार करना,
कपड़े गंदे नहीं रखना,
कपड़े गंदे नहीं रखना,
मुंह धोना,
नाख़ून काटना आदि छोटी-छोटी बातें बड़े प्रेम से सीखाते थे |
---
---
मेरे स्कूल में अंग्रेजी नहीं पढ़ाई जाती थी,
इसलिए मैंने अंग्रेजी की A, B, C, D, भी नहीं सीखी |
इसलिए मैंने अंग्रेजी की A, B, C, D, भी नहीं सीखी |
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से
No comments:
Post a Comment