Friday, August 24, 2012

१७. मेरा विद्यालय

मेरा विद्यालय 
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मैं पहली बार स्कूल गया, तब मेरी उम्र ६ वर्ष की रही होगी |
स्कूल जाते समय हम दोपहर का नाश्ता साथ ले जाते थे, 
मां के हाथ का बनाया हुआ वह ठंडा भोजन हमें बहुत ही मीठा और प्रिय लगता था |
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निर्धारित समय पर छुट्टी का घंटा बजता |
हम हल्ला मचाते - " चालो छोरां छुट्टी "
मुझे अपने क्लास का मोनिटर बना दिया गया |
बच्चों को पढाने के साथ-साथ मैं अनुशासन भी करता |
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ऐसा लगता है कि
अनुशासन करना मेरी रूचि का विषय था |
उल्लेखनीय है कि अनुशासन की अवहेलना मेरे लिए असह्य हो जाती |
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मेरी दूसरी अभिरुचि विद्वान बनने की थी |
विद्वान कौन होता है ? और कैसे बना जाता है ?
मैं जानता नहीं था |
पर वह भावना तीव्र थी |
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स्कूल में - हिंदी और गणित,
ये दो ही विषय पढाए जाते थे |
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मेरे शिक्षक हीरालालजी मुझे 
कैसे चलना, 
कैसे बैठना, 
बड़ों के साथ कैसे व्यवहार करना,
कपड़े गंदे नहीं रखना, 
मुंह धोना, 
नाख़ून काटना आदि छोटी-छोटी बातें बड़े प्रेम से सीखाते थे |
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मेरे स्कूल में अंग्रेजी नहीं पढ़ाई जाती थी,
इसलिए मैंने अंग्रेजी की A, B, C, D, भी नहीं सीखी |
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से

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