मेरे संस्कारों की पौध - मीडिया
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बालक के संस्कार-निर्माण में अनेक तत्वों का योग रहता है |
माता-पिता का स्वभाव, परिवार की परिस्थितियाँ, स्कूल का परिवेश,
मित्रों की मानसिकता, प्रभावशाली संपर्क आदि अनेक बातें हैं,
जो वातावरण के साथ घुली-मिली रहती है |
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बालक के संस्कार-निर्माण में अनेक तत्वों का योग रहता है |
माता-पिता का स्वभाव, परिवार की परिस्थितियाँ, स्कूल का परिवेश,
मित्रों की मानसिकता, प्रभावशाली संपर्क आदि अनेक बातें हैं,
जो वातावरण के साथ घुली-मिली रहती है |
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वर्तमान युग में " मीडिया " भी एक ऐसा माध्यम है,
जो विचार और व्यवहार को प्रभावित करता रहता है |
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जो विचार और व्यवहार को प्रभावित करता रहता है |
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मीडिया में समाचारपत्र और आकशवाणी से भी अधिक शक्तिशाली तत्व है -
दूरदर्शन |
दूरदर्शन पर प्रदर्शित किये जाने वाले दृश्य बालक के मन पर अतिशीघ्र प्रभाव छोड़ते हैं |
उसके दृश्य और श्रव्य उपकरणों द्वारा बालक तक जो पहुंचाया जाता है,
वह इतना जीवंत होता है कि ज्यों का त्यों आत्मसात हो जाता है |
इससे वस्तुबोध या ज्ञान-विज्ञान को समझने की क्षमता का विकास होता है
तो अपराध-चेतना का भी जागरण होता है |
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दूरदर्शन |
दूरदर्शन पर प्रदर्शित किये जाने वाले दृश्य बालक के मन पर अतिशीघ्र प्रभाव छोड़ते हैं |
उसके दृश्य और श्रव्य उपकरणों द्वारा बालक तक जो पहुंचाया जाता है,
वह इतना जीवंत होता है कि ज्यों का त्यों आत्मसात हो जाता है |
इससे वस्तुबोध या ज्ञान-विज्ञान को समझने की क्षमता का विकास होता है
तो अपराध-चेतना का भी जागरण होता है |
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संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि
इस प्रवृत्ति के द्वारा बच्चों का बचपन उनसे छीना जा रहा है |
इस प्रवृत्ति के द्वारा बच्चों का बचपन उनसे छीना जा रहा है |
- गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की आत्मकथा
" मेरा जीवन मेरा दर्शन " से
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